अंटार्कटिका का सबसे ख़तरनाक बचाव अभियान
मैल्कम रॉबर्ट्स को जठरांत्र रक्तस्राव यानी गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ब्लीडिंग की समस्या उत्पन्न हुई तो वे किसी भी अस्पताल से हज़ारों मील दूर थे. क्या डॉक्टरों की एक टीम उन्हें बचाने के लिए समय पर पहुंच पाएगी?
अप्रैल 2015 के अन्तिम दिनों में अंटार्कटिका में एक बचाव अभियान के लिए रक्त की थैलियों से भरे एक हवाई जहाज में टिम नटबीम को भेजा गया. नटबीम ब्रिटेन में आपात चिकित्सा के एक सलाहकार हैं.
सर्दियों के शुरूआती दिन थे और ऐसे में पूरा महाद्वीप अंधेरे और भयंकर सर्दी के साथ-साथ तेज हवाओं की चपेट में होता है. छह महीने तक चलने वाली इस ऋतु में आमतौर पर उड़ानें नहीं होतीं.
लेकिन, नटबीम एक पायलट और इंजीनियर को साथ लेकर इस यात्रा पर निकल पड़े. इनका मकसद अंटार्कटिक बेस में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही एक ज़िन्दगी को बचाना था.
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के एक इंजीनियर मैलकम रॉबर्ट्स को कुछ दिनों पहले हैली रिसर्च स्टेशन पर भयंकर जठरांत्र रक्त स्राव की समस्या उत्पन्न हो गई थी. वे किसी भी निकटवर्ती अस्पताल से हज़ारों मील दूर थे.
रॉबर्ट्स का काफी खून बह गया था लेकिन पिछले 24 घंटों से उन्होंने हिम्मत बांधी हुई थी. यदि बचावकर्मी समय पर पहुंच जाएं तो उनके ज़िन्दा बचने की कुछ उम्मीद हो सकती है लेकिन बचावकर्मियों के रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां हैं.
हैली तक की हवाई यात्रा में ईंधन भरने के लिए अंटार्कटिक प्रायद्वीप पर बने एक अन्य बेस रोथेरा में रूकना पड़ेगा और इसमें 24 घंटे लग जाएंगे. दुबारा भी यही यात्रा करनी है अर्थात कुल 48 घंटों की यात्रा. वापसी में बचाव दल को आपातस्थिति से भी निपटना है.
मरीज़ की जान बचाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. लेकिन क्या नटबीम इस अभियान से मनौवैज्ञानिक रूप से निपट पाएंगे.
नटबीम को शुरू में तो इस अभियान पर जाना भी नहीं था. जब आपातस्थिति उत्पन्न हुई तो उन्हें चिली के सबसे दक्षिण हिस्से पुन्टा ऐरेनास नामक जगह पर पहुंचाया गया था ताकि उन्हें जहाज के उतरने के बाद अतिरिक्त मदद के रूप में उपयोग किया जा सके. लेकिन उस स्थान के ठीक उत्तर में एक ज्वालामुखी फटने के बाद सब कुछ बदल गया.
इस अभियान पर जिस डॉक्टर को जाना था वह सेंटियागो में इंतज़ार कर रहा था. ज्वालामुखी विस्फोट के बाद सारी उड़ानें रद्द कर दी गईं. चिली और अंटार्कटिका के बीच मौसम ने ऐसी करवट बदली कि आगे दिखना काफी कम हो गया.
अचानक नटबीम को पता चला कि उन्हें अभियान पर जाना होगा. वो मानते हैं कि सब कुछ इतना तेजी से हुआ कि उन्हें उस समय इस अभियान पर मिलने वाले खतरों के बारे में सोचने का मौका ही नहीं मिला. वे तो अंटार्कटिक की यात्रा के बारे में सोचकर रोमांचित हो रहे थे.
अनोखे व्यक्तित्व
अंटार्कटिक में सर्दियों में बहुत कम चिकित्सकीय बचाव अभियान चलाए गए हैं. वर्ष 2016 में सर्दियों के मध्य में जब दक्षिणी ध्रुव पर चौबीसों घंटे अंधेरा रहता है तब एक बीमार कर्मी को दक्षिणी ध्रुव से हवाई जहाज के रास्ते बचाया गया था. वर्ष 2010 में अमरीका के मुख्य शोध केन्द्र से भी एक मरीज़ को बचाया गया था.
ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता नैथन स्मिथ का मानना है कि लोग ऐसे अभियानों में भाग इसलिए लेते हैं कि वे ऐसा कुछ करना चाहते हैं जो अन्य लोग न करना चाहते हों.
शोध में पाया गया है कि जो लोग समझदार होते हैं वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं. स्मिथ बताते हैं कि जिन कामों में अधिक खतरा होता है उनमें ऐसे लोग ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन करते हैं.
कर्तव्यनिष्ठा की भी अपनी भूमिका होती है. उदाहरण के लिए व्यक्तित्वों के प्रकार से संबंधित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अधिक खतरा उठाने के इच्छुक रहते हैं, वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा के बल पर भीषण परिस्थितियों से निपट सकते हैं.
दरअसल यह बात उस आम धारणा के विपरीत है जिसमें यह माना जाता है कि एक्स्ट्रीम एक्टिविटीज़ यानी चरम गतिविधियों में भाग लेने वाले लोग दरअसल भावावेश में यह काम करते हैं.
स्मिथ मानते हैं कि ऐसे लोग काफी समय उस भावावेश से निपटने की तैयारी में लगाते हैं.
लम्बी यात्रा में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नटबीम और उनके दल को भी काफी सावधानी बरतनी होगी.
जैसे कि पूरी यात्रा में नटबीम को रक्त की थैलियों के तापमान पर निगरानी रखनी है. हवाई जहाज में आगे का हिस्सा तो गर्म था लेकिन पीछे तापमान 10 डिग्री सेल्सियस था. नटबीम को रक्त की थैलियां रखने के लिए उचित स्थान ढूंढना पड़ा और हर घंटे उसकी निगरानी करनी पड़ी.
हैली में सुबह हो रही थी और यह दल वहां उतरा. अब दल के पास रॉबर्ट्स को हवाई जहाज में लादने और वापस जाने के लिए केवल डेढ़ घंटे थे. इसके बाद उड़ान के लिहाज से बहुत अंधेरा हो जाता.
हवा की ठंडक के बिना ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था. नटबीम ने हवाई जहाज से स्टेशन तक का फासला स्नोमोबाइल यानी बर्फ पर चलने वाले स्कूटर से तय किया और एक तरह से अंटार्कटिका में पहली बार होने वाले रक्त-आधान यानी ट्रांसफ्यूजन को अंज़ाम दिया.
इसके बाद रॉबर्ट्स को हवाई जहाज में ले आया गया. इधर, हवाई जहाज के इंजन लगातार चल रहे थे.
नटबीम का मानना है कि अनुमान न लगाए जा सकने वाली परिस्थितियों के कारण बहुत ज़्यादा योजना नहीं बनाई गई थी.
पहले भी अभियानों पर गए लोगों से बातचीत में स्मिथ और उनके सहयोगियों को पता चला कि योजना बनाने से ज़्यादा महत्वपूर्ण अपनी कुशलता पर विश्वास होना है.
वे मानते हैं कि आपको अपनी योजनाओं में लचीलापन रखना पड़ता है जिससे स्थिति के अनुरूप काम किया जा सके.
अप्रैल 2015 के अन्तिम दिनों में अंटार्कटिका में एक बचाव अभियान के लिए रक्त की थैलियों से भरे एक हवाई जहाज में टिम नटबीम को भेजा गया. नटबीम ब्रिटेन में आपात चिकित्सा के एक सलाहकार हैं.
सर्दियों के शुरूआती दिन थे और ऐसे में पूरा महाद्वीप अंधेरे और भयंकर सर्दी के साथ-साथ तेज हवाओं की चपेट में होता है. छह महीने तक चलने वाली इस ऋतु में आमतौर पर उड़ानें नहीं होतीं.
लेकिन, नटबीम एक पायलट और इंजीनियर को साथ लेकर इस यात्रा पर निकल पड़े. इनका मकसद अंटार्कटिक बेस में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही एक ज़िन्दगी को बचाना था.
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के एक इंजीनियर मैलकम रॉबर्ट्स को कुछ दिनों पहले हैली रिसर्च स्टेशन पर भयंकर जठरांत्र रक्त स्राव की समस्या उत्पन्न हो गई थी. वे किसी भी निकटवर्ती अस्पताल से हज़ारों मील दूर थे.
रॉबर्ट्स का काफी खून बह गया था लेकिन पिछले 24 घंटों से उन्होंने हिम्मत बांधी हुई थी. यदि बचावकर्मी समय पर पहुंच जाएं तो उनके ज़िन्दा बचने की कुछ उम्मीद हो सकती है लेकिन बचावकर्मियों के रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां हैं.
हैली तक की हवाई यात्रा में ईंधन भरने के लिए अंटार्कटिक प्रायद्वीप पर बने एक अन्य बेस रोथेरा में रूकना पड़ेगा और इसमें 24 घंटे लग जाएंगे. दुबारा भी यही यात्रा करनी है अर्थात कुल 48 घंटों की यात्रा. वापसी में बचाव दल को आपातस्थिति से भी निपटना है.
मरीज़ की जान बचाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. लेकिन क्या नटबीम इस अभियान से मनौवैज्ञानिक रूप से निपट पाएंगे.
नटबीम को शुरू में तो इस अभियान पर जाना भी नहीं था. जब आपातस्थिति उत्पन्न हुई तो उन्हें चिली के सबसे दक्षिण हिस्से पुन्टा ऐरेनास नामक जगह पर पहुंचाया गया था ताकि उन्हें जहाज के उतरने के बाद अतिरिक्त मदद के रूप में उपयोग किया जा सके. लेकिन उस स्थान के ठीक उत्तर में एक ज्वालामुखी फटने के बाद सब कुछ बदल गया.
इस अभियान पर जिस डॉक्टर को जाना था वह सेंटियागो में इंतज़ार कर रहा था. ज्वालामुखी विस्फोट के बाद सारी उड़ानें रद्द कर दी गईं. चिली और अंटार्कटिका के बीच मौसम ने ऐसी करवट बदली कि आगे दिखना काफी कम हो गया.
अचानक नटबीम को पता चला कि उन्हें अभियान पर जाना होगा. वो मानते हैं कि सब कुछ इतना तेजी से हुआ कि उन्हें उस समय इस अभियान पर मिलने वाले खतरों के बारे में सोचने का मौका ही नहीं मिला. वे तो अंटार्कटिक की यात्रा के बारे में सोचकर रोमांचित हो रहे थे.
अनोखे व्यक्तित्व
अंटार्कटिक में सर्दियों में बहुत कम चिकित्सकीय बचाव अभियान चलाए गए हैं. वर्ष 2016 में सर्दियों के मध्य में जब दक्षिणी ध्रुव पर चौबीसों घंटे अंधेरा रहता है तब एक बीमार कर्मी को दक्षिणी ध्रुव से हवाई जहाज के रास्ते बचाया गया था. वर्ष 2010 में अमरीका के मुख्य शोध केन्द्र से भी एक मरीज़ को बचाया गया था.
ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता नैथन स्मिथ का मानना है कि लोग ऐसे अभियानों में भाग इसलिए लेते हैं कि वे ऐसा कुछ करना चाहते हैं जो अन्य लोग न करना चाहते हों.
शोध में पाया गया है कि जो लोग समझदार होते हैं वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं. स्मिथ बताते हैं कि जिन कामों में अधिक खतरा होता है उनमें ऐसे लोग ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन करते हैं.
कर्तव्यनिष्ठा की भी अपनी भूमिका होती है. उदाहरण के लिए व्यक्तित्वों के प्रकार से संबंधित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अधिक खतरा उठाने के इच्छुक रहते हैं, वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा के बल पर भीषण परिस्थितियों से निपट सकते हैं.
दरअसल यह बात उस आम धारणा के विपरीत है जिसमें यह माना जाता है कि एक्स्ट्रीम एक्टिविटीज़ यानी चरम गतिविधियों में भाग लेने वाले लोग दरअसल भावावेश में यह काम करते हैं.
स्मिथ मानते हैं कि ऐसे लोग काफी समय उस भावावेश से निपटने की तैयारी में लगाते हैं.
लम्बी यात्रा में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नटबीम और उनके दल को भी काफी सावधानी बरतनी होगी.
जैसे कि पूरी यात्रा में नटबीम को रक्त की थैलियों के तापमान पर निगरानी रखनी है. हवाई जहाज में आगे का हिस्सा तो गर्म था लेकिन पीछे तापमान 10 डिग्री सेल्सियस था. नटबीम को रक्त की थैलियां रखने के लिए उचित स्थान ढूंढना पड़ा और हर घंटे उसकी निगरानी करनी पड़ी.
हैली में सुबह हो रही थी और यह दल वहां उतरा. अब दल के पास रॉबर्ट्स को हवाई जहाज में लादने और वापस जाने के लिए केवल डेढ़ घंटे थे. इसके बाद उड़ान के लिहाज से बहुत अंधेरा हो जाता.
हवा की ठंडक के बिना ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था. नटबीम ने हवाई जहाज से स्टेशन तक का फासला स्नोमोबाइल यानी बर्फ पर चलने वाले स्कूटर से तय किया और एक तरह से अंटार्कटिका में पहली बार होने वाले रक्त-आधान यानी ट्रांसफ्यूजन को अंज़ाम दिया.
इसके बाद रॉबर्ट्स को हवाई जहाज में ले आया गया. इधर, हवाई जहाज के इंजन लगातार चल रहे थे.
नटबीम का मानना है कि अनुमान न लगाए जा सकने वाली परिस्थितियों के कारण बहुत ज़्यादा योजना नहीं बनाई गई थी.
पहले भी अभियानों पर गए लोगों से बातचीत में स्मिथ और उनके सहयोगियों को पता चला कि योजना बनाने से ज़्यादा महत्वपूर्ण अपनी कुशलता पर विश्वास होना है.
वे मानते हैं कि आपको अपनी योजनाओं में लचीलापन रखना पड़ता है जिससे स्थिति के अनुरूप काम किया जा सके.
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