अयोध्या विवाद: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला सुलझाएंगे ये तीन लोग

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले को शुक्रवार को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों वाली पीठ ने तीन सदस्यों को मध्यस्थता समिति का सदस्य बनाया है.

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फ़कीर मोहम्मद इब्राहिम ख़लीफ़ुल्ला इस समिति के प्रमुख होंगे.

उन्होंने कहा था, ''मैं बचपन में नटखट था और आज भी हूँ. मैं चाहता हूँ कि हर बच्चा शरारती हो और बड़ों को जितना सता सके उतना सताए. लेकिन आज बच्चे जब तनाव में होते हैं तो दूसरों को तंग करते हैं.''

उन्होंने कहा था, ''खेल मुझे बचकाने लगते थे. बचपन में भी मैं गंभीर चिंतन करता था. जब लोगों को क्रिकेट खेलते देखता था तो ये सोचता कि इससे क्या मिलने वाला है? मेरी संगीत, नृत्य और नाटक में बहुत रुचि थी. खेल में रुचि नहीं थी.''

श्री श्री रविशंकर कई बार फ़िल्मी सितारों के साथ भी नज़र आए हैं.

लेकिन फ़िल्मों को लेकर वो क्या सोचते हैं?
उन्होंने कहा था, ''मैं फ़िल्मी सितारों को हस्ती या सितारे की तरह नहीं देखता. मैं तो सारे जीवन को ही एक फ़िल्म मानता हूँ. जो भी मनुष्य मेरे सामने आता है वो भी मुझे एक फ़िल्म ही लगता है. हर आदमी हीरो और हीरोइन है. सभी की अपनी एक कहानी है. उसे ही सुलझाने में लगा रहता हूँ.''

रविशंकर ने बताया था कि ज़िंदगी धूप तुम घना साया...जैसे गाने भक्त लोग सत्संग में गाते हैं. उनकी आँखों से गीत फूट पड़ता है. हालांकि उनका पसंदीदा गाना- 'चाहूँगा मैं तुझे सांझ सवेरे' है.

जब पाकिस्तान दौरे पर गए श्री श्री रविशंकर
क़रीब सात साल पहले मार्च के ही महीने में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर पाकिस्तान के दौरे पर थे.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अपने एक आश्रम की शुरुआत के बाद उन्होंने बीबीसी से कहा कि वो 'तालिबान और दूसरे उग्रपंथियों से बात करने को तैयार हैं'.

एक लंबे साक्षात्कार के दौरान श्री श्री रविशंकर ने दावा किया, "मेरा पहले से मक़सद रहा कि किसी न किसी तरह से लोगों के बीच की दूरी को कम करें. अमन और सुकून की नई लहर लाएं." ये बयान भारत में काफी चर्चा में रहा था.

मार्च 2017 में श्री श्री रविशंकर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि अगर अयोध्या विवाद नहीं सुलझा तो 'भारत में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे'.

तब श्री श्री रविशंकर ने एनडीटीवी को बताया था, ''अगर कोर्ट कहता है कि ये जगह बाबरी मस्जिद की है तो क्या लोग इस बात को आसानी और खुशी से मान लेंगे? ये बात 500 सालों से मंदिर की लड़ाई लड़ रहे बहुसंख्यकों के लिए कड़वी गोली की तरह होगी. ऐसी स्थिति में खून-ख़राबा भी हो सकता है.''

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में रविशंकर ने कहा था, '"बाबरी मस्जिद/राम जन्म भूमि के विवाद का हल अदालत के बजाए इसके बाहर निकाला जाना चाहिए. मुस्लिम समाज राम मंदिर पर अपना दावा त्याग दे और इसके एवज़ में उन्हें अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ ज़मीन दी जाए."

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